बतकही

बातें कही-अनकही…

कथेतर

मध्याह्न भोजन—एक

‘मध्याह्न भोजन’ ! प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों को एक समय का दिया जानेवाला भोजन ! जिसके कारण हमारे ये विद्यालय ‘दाल-भात वाला विद्यालय’ कहे जाते हैं ! जिसको लेकर हमारा समाज सालों से लगातार बहस कर रहा है, कोई इसके पक्ष में है तो कोई विरोध में | अनेक बुद्धिजीवियों सहित इन्हीं विद्यालयों के अनेक अध्यापक भी इसपर निरंतर बौद्धिक जुगाली करते हुए अक्सर मिल जाएँगे | इन तमाम बातों से…

कविता

अम्बेडकर ने कब कहा था…

मैंने तो कहा था— शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो ! ये तीन मंत्र निचोड़ थे, मेरे जीवन भर के परिश्रम और संघर्षों के जिन्हें मैंने तुमको दिया था अनमोल धरोहर के रूप में ! ताकि तुम भी अधिकार पा सको — अपने मानव होने के | सम्मान और पहचान मिल सकें — तुम्हारी संस्कृति एवं सभ्यता को भी | और तुम भी जी पाओ — एक सम्मानजनक मानव-जीवन...! मैंने कहा था— ‘शिक्षित बनो’... तो…

कथेतर

‘सुबह के अग्रदूत’— दो

भूमिका बडोला ...जब हमारे चारों ओर निराशमय वातावरण हो, नकारात्मक शक्तियाँ अपने चरम पर हों, राजनीतिक-परिदृश्य निराशा उत्पन्न कर रहा हो, सामाजिक-सांस्कृतिक हालात बद से बदतर होते जा रहे हों, लोगों के विचारों एवं बौद्धिक-चिंतन में लगातार कलुषता भरती चली जा रही हो और एक-दूसरे के प्रति वैमनस्यता तेज़ी से अपने पाँव पसार रही हो... तब ऐसे में जब युवा हो रही पीढ़ी के बीच से कुछ ऐसे लोग निकलकर सामने आने लगें, जो अंगद…

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