बतकही

बातें कही-अनकही…

शोध/समीक्षा

1857 की क्रांति: कितना स्वाधीनता-संग्राम, कितना ब्राह्मण-वर्चस्व का षड्यंत्र?

भारतीय ‘स्वाधीनता संग्राम’ के इतिहास में 1857 के विद्रोह को स्वाधीनता के लिए ‘महान विद्रोह’ के रूप में याद किया जाता है | लेकिन क्या वाकई में वह अंग्रेज़ों से ‘देश’ की मुक्ति के लिए छेड़ा गया ‘स्वाधीनता संग्राम’ था, अथवा वह एक वर्ग-विशेष, ब्राह्मण-वर्ग, के भारतीय समाज, संस्कृति, राजनीति और आर्थिक-तंत्र पर पुनः कब्ज़े के लिए छेड़ा गया हिंसक अभियान था, जिसमें जनता को मूर्ख बनाकर उसकी भावनाओं का नकारात्मक-दोहन करते हुए उसे शामिल…

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विश्व पुस्तक मेला 2023

खंड-छः : पुस्तक मेले में धार्मिक अल्पसंख्यक समाज इस बार 2023 का विश्व पुस्तक मेला (दिल्ली) जिस तरह से सनातनी समाज के एक हिस्से के आतंक से व्याप्त था, उस प्रभाव को देखते हुए यह प्रश्न बहुत मायने रखता है कि धार्मिक अल्पसंख्यक वर्ग, ख़ासकर मुस्लिम और ईसाई समाज की कैसी उपस्थिति और भागीदारी उस पुस्तक मेले में थी? वास्तव में पिछले 12-13 सालों में जो भय, आशंका और आतंक का माहौल पूरे देश में…

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विश्व पुस्तक मेला 2023

खंड-पाँच : पुस्तक मेले में स्त्रियाँ 25 फरवरी से 5 मार्च तक चले इस बार के (2023) विश्व पुस्तक मेले (दिल्ली) में क्या स्त्रियों की भागीदारी थी? यदि हाँ, तो किस रूप में? क्या मानवता-विरोधी सनातनी-परम्पराओं की रक्षा के लिए ‘वीरांगना’ रूप में? अथवा मानवता के पक्ष में खड़ी जुझारू योद्धा रूप में? या वर्त्तमान युवा-पीढ़ी के ऐसे हिस्से के रूप में, जो इस समय भेड़चाल चलती हुई समाज के साथ-साथ अपने लिए भी गहरी…

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विश्व पुस्तक मेला 2023

खंड-चार : पुस्तक मेले में वंचित-समाज हॉल संख्या 2, 3 और 4 (जो अगल-बगल ही थे) के बाहर लगभग 8-9 बच्चे (जिनमें लड़के और लड़कियाँ दोनों ही थे) एक-दूसरे का हाथ पकड़े चहलकदमी करते हुए दिखाई दिए | वे या तो उनमें से किसी हॉल की ओर जाने का उपक्रम कर रहे थे या किसी हॉल से निकलकर बाहर जाने से पहले पूरे परिसर को देख लेने के ख्वाहिशमंद थे | बच्चों की उम्र अंदाजन…

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विश्व पुस्तक मेला 2023

खंड-तीन : पुस्तक मेले में ‘मोदी-वंदना’ के निहितार्थ जैसाकि पुस्तक-मेले से संबंधित पिछले लेखों से आभास मिल रहा है कि 2023 का विश्व पुस्तक मेला (दिल्ली) एक ‘ख़ास प्रभाव’ से आच्छादित रहा, तो स्वाभाविक है कि उस ‘ख़ास प्रभाव’ का असर चारों ओर दिखाई देना ही था | उसी में शामिल है वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यहाँ विविध प्रकार से जबरन ख़ूब अधिक हाईलाइट किया जाना; जिस प्रकार से मौक़े-बेमौक़े पूरे देश में ‘मोदीनामा’…

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विश्व पुस्तक मेला 2023

खंड-दो : पुस्तक मेले पर सनातनी-कब्ज़े की कोशिश पहले खंड से आगे... इस साल के विश्व पुस्तक मेले में मेरा दो दिन जाना हुआ, 3 मार्च और 5 मार्च को | इन दो दिनों के दौरान मैंने पुस्तक मेले के मिजाज़ को भी समझने की यथासंभव कोशिश की | वह ख़ास मिजाज़ था, लगभग सम्पूर्ण पुस्तक मेले को अपने प्रभाव और ताक़त से आच्छादित करता हुआ सनातनी-प्रभाव, जो उसके हर हिस्से को कम या अधिक…

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विश्व पुस्तक मेला 2023

खंड-एक : नए रूप-रंग में विश्व पुस्तक मेला दिल्ली में इस बार तीन सालों के बाद विश्व पुस्तक मेले का आयोजन हुआ, जो 25 फरवरी से 5 मार्च तक, यानी कुल 9 दिनों तक चला | 2020 के बाद दो सालों तक यह मेला आभासी (वर्चुअल) रूप से आयोजित हुआ था और अब इस साल यह अपने पुराने रूप में लौटा था | लेकिन अपनी पिछली पुस्तकीय संस्कृति और परम्पराओं से अलग, इस बार यह…

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उपन्यासों के आइने में इतिहास के चेहरे

पुस्तक समीक्षा 'आधुनिक भारत का ऐतिहासिक यथार्थ' (लेखक : हितेन्द्र पटेल) राजकमल प्रकाशन, दिल्ली इसी साल जनवरी के पहले सप्ताह में मेरे पास एक किताब आई थी, जिसका शीर्षक था ‘आधुनिक भारत का ऐतिहासिक यथार्थ’ | राष्ट्रीय स्तर की प्रसिद्ध मासिक पत्रिका ‘समयांतर’ के संपादक महोदय पंकज बिष्ट जी ने यह किताब मुझे इसकी समीक्षा लिखने के लिए भेजी थी | दरअसल यह किताब पिछले साल (2022) अपने दो-दो संस्करणों के साथ प्रकाशित हुई है…

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