बतकही

बातें कही-अनकही…

शोध/समीक्षा

मेनका-विश्वामित्र कथा : आर्यों का लव-जिहाद

(शत्रु को फाँसने हेतु स्त्री एक चारा) पिछले लेख में यह देखा गया कि किस तरह अनेक कारणों से आर्यों के कबीले आपस में ही लड़ते-झगड़ते रहते थे | यहाँ आर्यों के इसी झगड़े की पृष्ठभूमि में ‘विश्वामित्र-मेनका’ की कहानी को एक नए तरीके से देखने की कोशिश होगी, जिसमें दुश्मन को फाँसने के लिए स्त्री को एक ‘चारे’ की तरह प्रयोग किए जाते देखा जा सकता है; जिस तरह शिकारी किसी जंगली जानवर को…

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आर्य : भारत में ‘लव-जिहाद’ के जन्मदाता

भारत में काफी समय से यह प्रचारित किया जाता रहा है कि यहाँ मुसलमानों ने हिन्दुओं को नीचा दिखाने और अपमानित करने के लिए ‘लव-जिहाद’ को अपना एक कारगर हथियार बनाया | लेकिन सच्चाई कुछ और ही है | हालाँकि भारत में सबसे पहले किस व्यक्ति ने अपने दुश्मनों या प्रतिद्वंद्वियों को हराने, नीचा दिखाने और समाज में अपमानित करने के लिए ‘स्त्री-पुरुष-प्रेम’ को अपना हथियार बनाया होगा, यह तो पता नहीं; लेकिन भारत-भूमि पर…

निबंध

‘अप्प दीपो भव’ : नए तेवर के साथ 21वीं सदी का वंचित-समाज

जब 1848 ई. में फुले-दंपत्ति (ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले) ने लड़कियों (3 जनवरी 1848, भिंडेवाड़ा) और दलितों (15 मई 1848, महारवाड़ा) के लिए पहले आधुनिक-विद्यालय की शुरुआत करते हुए महिला-आन्दोलन और दलित-आन्दोलन की नींव डाली और उनके केवल कुछ ही दशक बाद डॉ. भीमराव आंबेडकर ने इन आंदोलनों को नई धार देकर बहुमुखी और बहुस्तरीय बना दिया; तो उसके बाद समाज में एक ऐसी आँधी चलनी शुरू हो गई, जिसमें सारा ब्राह्मणवाद, पुरुषवाद, पितृसत्ता…

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1857 का विद्रोह : ‘रोटी’ और ‘कमल’ ही सन्देशवाहक क्यों बने?

1857 के विद्रोह को ज्योतिबा फुले ‘चपाती विद्रोह’ कहते हैं, सवाल है कि क्यों? दरअसल ब्राह्मणों ने अपने गुप्त संदेश गाँव-गाँव पहुँचाने के लिए कमल के फ़ूल के साथ-साथ चपाती/रोटी का प्रयोग किया था | उस ‘चपाती विद्रोह’ के प्रमुखतम सूत्रधार छुपे रूप में ब्राह्मण पेशवा नाना साहेब के नेतृत्व में समस्त ब्राह्मण ही थे1, जिन्होंने मुगलों के कंधों पर रखकर बंदूक चलाई थी— मौक़ा पाते ही “मराठा सरदार (मराठा नहीं, बल्कि मराठों के प्रधानमंत्री,…

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1857 का विद्रोह : ईसाई-धर्मान्तरण की अफ़वाहों का सच

एक सवाल है, कि भारत-भूमि पर सबसे पहले किसने किसका धर्मान्तरण किया होगा? क्योंकि भारत में आनेवाले पहले विदेशी तो आर्यों के अलग-अलग जत्थे ही थे; जिनके आने से पहले भारत के निवासियों के पास अपना धर्म, अपनी सभ्यता और संस्कृति थी | जिसके बेहद ठोस और अकाट्य प्रमाण हैं सिंधु-सभ्यता से मिलनेवाले सैकड़ों पुरातात्विक-अवशेष; जिसमें पशुपति की मूर्ति से लेकर पुजारी की मूर्ति, धार्मिक-प्रयोजन से निर्मित लिंग और योनि की मूर्तियाँ एवं विशाल स्नानागार…

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1857 का विद्रोह : ब्रिटिश-सेना के नियमों से भारतीयों की नाराज़गी का सच

1857 के विद्रोह को ‘जन-विद्रोह’ के साथ-साथ ‘सैनिक-विद्रोह’ भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें सैनिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया था; सवर्ण-सैनिकों ने | केवल अवध से ही 75000 सवर्ण-सैनिकों (अधिकांश ब्राह्मण) के इस ‘महाविद्रोह’ में भाग लेने की जानकारी मिलती है | ‘ब्रिटिश-सैनिक’ के रूप में सवर्ण-पुरुष अपनी ही मर्जी से ब्रिटिश-सेना में शामिल हुए थे, अंग्रेजों ने इसके लिए उनको मजबूर नहीं किया था | सवर्ण-सैनिक भारतीय-शासकों के ख़िलाफ़ विभिन्न ब्रिटिश-अभियानों में जाते थे,…

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1857 का विद्रोह : ‘समान दंड संहिता’ से सवर्ण-समाज को क्यों कष्ट हुआ?

जब अंग्रेजी ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ भारत आई और उसने अपने पैर जमा लिए, तब अपने प्रभाव को व्यापक बनाने के ऊदेश्य से और कुछ न्यायपूर्ण व्यवस्था स्थापित करने के लिए भी, उसने कई महत्वपूर्ण एवं प्रभावशाली कानून बनाए | उसी के साथ उन कानूनों के पालन की महत्वपूर्ण और प्रभावशाली व्यवस्थाएँ भी की गईं और न्यायपालिका के जरिए विविध अपराधों के संबंध में न्याय की व्यवस्था भी की गई | वॉरेन हेस्टिंग्स के समय (1772-1785…

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1857 का विद्रोह : ब्रिटिश वस्तुओं में गाय और सूअर की चर्बी एवं हड्डी की अफवाह का खेल

1857 के विद्रोह से कुछ पहले से ही केवल सैनिकों में ही नहीं बल्कि जनता के बीच भी जंगल की आग की तरह बड़ी तेजी से कई अफवाहें फ़ैल रही थीं, या शायद जानबूझकर फैलाई जा रही थीं | जानबूझकर इसलिए कहा जा रहा है, क्योंकि कई इतिहासकार स्वयं ही बार-बार ऐसी ‘बातों’ को ‘अफवाह’ कहकर ही लिख रहे हैं | जैसाकि हम इस लेख में भी देखेंगे, कि अनेक इतिहासकारों की बातें इसका प्रमाण…

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