बतकही

बातें कही-अनकही…

आलोचना

कृष्ण-रुक्मिणी प्रेमकथा : आर्यों का ‘लव-जिहाद’

शत्रु को नीचा दिखाने हेतु स्त्री एक ‘माध्यम’ आर्यों ने केवल भारत की मूल-निवासी जातियों की महिलाओं को ही अपने तथाकथित ‘प्रेम’ का शिकार नहीं बनाया; बल्कि वे अपने दुश्मनों और प्रतिद्वंद्वियों को कमज़ोर साबित करने, नीचा दिखाने, समाज में हास्यास्पद (हंसी का पात्र) बनाकर अपमानित करने के लिए भी शत्रुओं की बहन-बेटियों को निशाना बनाते थे और उनको जबरन या धोखे से उठा ले जाते थे | महाभारत में ऐसी दर्जनों कहानियाँ वर्णित हैं,…

आलोचना

भीष्म और अम्बा-अम्बिका-अम्बालिका : आर्यों का लव-जिहाद

(स्त्रियाँ बेजुबान पशु या निर्जीव वस्तु) जहाँ भारत के मूल-निवासियों और कई ग़ैर-आर्य संस्कृतियों में स्त्रियों का स्थान या तो ऊँचा था, या कम-से-कम पुरुषों के बराबर, जिस कारण उनके स्वाभिमान और सम्मान का महत्त्व था और उनके अधिकार भी कमोवेश पुरुषों के लगभग बराबर थे | वहीं आर्य-संस्कृति में स्त्रियाँ एक निर्जीव सामान या वस्तु की तरह देखी जाती थीं, अथवा पालतू पशुओं की तरह | इसीलिए आर्य अपनी स्त्रियों के साथ पशुओं और…

आलोचना

शांतनु-सत्यवती प्रेम-कथा : आर्यों का लव-जिहाद

विद्रोही-समाजों को नियंत्रित करने हेतु उनकी स्त्रियाँ भावनात्मक रूप से ‘बंधक’ आक्रमणकारी-आर्य जब मध्य-एशिया से चले और हमलावर बनकर रास्ते में पड़नेवाली सभ्यताओं-संस्कृतियों, उनके शहरों-नगरों-गाँवों को रौंदते हुए भारत में घुसे, तो वे अपने साथ आर्य-स्त्रियाँ लेकर नहीं आए थे; उनके साथ केवल गिनी-चुनी स्त्रियाँ ही आई थीं | इसलिए उन्होंने यहाँ आने के बाद ग़ैर-आर्य समाजों और मूल-निवासी समाजों की स्त्रियों पर अपनी नज़रें टिकाई | वैसे भी उनकी क़बीलाई स्त्रियाँ कबीलाई-किस्म की ही…

आलोचना

पराशर-मत्स्यगंधा कथा : आर्यों का लव-जिहाद

(असहाय-अकेली स्त्री भोग की वस्तु) आर्य जब अपनी तलवारों और तीर-धनुष के बल पर रक्तपात करते हुए भारत में घुसे, तो यहाँ पहले से रह रहे निवासियों द्वारा उनका जबर्दस्त विरोध-प्रतिरोध हुआ | हालाँकि आर्यों के शुरूआती हमले इतने अचानक थे और धोखाधड़ी के साथ भी, कि आरम्भ में यहाँ के निवासी संभलने का मौका नहीं पा सके और बड़ी संख्या में उनका नरसंहार हुआ | लेकिन जब उन पूर्व-निवासियों को आर्यों की नीयत समझ…

शोध/समीक्षा

दुष्यंत-शकुंतला प्रेम-कथा : आर्यों का लव-जिहाद

(शत्रु को नीचा दिखाने हेतु स्त्री एक माध्यम) पिछले लेख में यह देखा गया कि किस तरह भरत-कबीले के राजपुरोहित-पद पर वशिष्ठ की नियुक्ति का विरोध करने और बदले में ‘दाशराज्ञ-युद्ध’ छेड़ने के लिए ज़िम्मेदार विश्वामित्र को घेरने और मारने के लिए वशिष्ठ-दुष्यंत ने मेनका नाम की एक देव-वेश्या (अप्सरा) का प्रयोग किया था; लेकिन वे अपनी उस योजना में सफ़ल नहीं हुए | तब उन्होंने विश्वामित्र की बेटी, जो अप्सरा मेनका से ही जन्मी…

शोध/समीक्षा

मेनका-विश्वामित्र कथा : आर्यों का लव-जिहाद

(शत्रु को फाँसने हेतु स्त्री एक चारा) पिछले लेख में यह देखा गया कि किस तरह अनेक कारणों से आर्यों के कबीले आपस में ही लड़ते-झगड़ते रहते थे | यहाँ आर्यों के इसी झगड़े की पृष्ठभूमि में ‘विश्वामित्र-मेनका’ की कहानी को एक नए तरीके से देखने की कोशिश होगी, जिसमें दुश्मन को फाँसने के लिए स्त्री को एक ‘चारे’ की तरह प्रयोग किए जाते देखा जा सकता है; जिस तरह शिकारी किसी जंगली जानवर को…

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