बतकही

बातें कही-अनकही…

कथेतर

मनोहर चमोली ‘मनु’

‘बाल-साहित्य’ के माध्यम से समाज की ओर यात्रा... भाग दो :- ‘मनोहर चमोली’ से ‘मनोहर चमोली’ तक   मनोहर चमोली ‘मनु’...! एक बाल-साहित्यकार...! उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल में पौड़ी जिले के अंतर्गत स्थित राजकीय उच्च विद्यालय, केवर्स के एक समर्पित अध्यापक | कई लोगों, या यूँ कहा जाय, कि अपने विरोधियों एवं इस साहित्यकार-अध्यापक को नापसंद करनेवालों की दृष्टि में एक बहिर्मुखी-व्यक्तित्व, एक अहंकारी, मुँहफट, ज़िद्दी, आत्म-मुग्ध, आत्म-प्रवंचना के शिकार, अपने विचारों के प्रति अति-आग्रही...…

कथेतर

मनोहर चमोली ‘मनु’

‘बाल-साहित्य’ के माध्यम से समाज की ओर यात्रा... भाग-एक :- ‘मनोहर चमोली’ होने का अर्थ... सफ़दर हाशमी ने कभी बच्चों को सपनों और कल्पनाओं की दुनिया में ले जाने की कोशिश में उन्हें संबोधित करते हुए लिखा था— “किताबें कुछ कहना चाहती हैं।तुम्हारे पास रहना चाहती हैं॥ किताबों में चिड़िया चहचहाती हैंकिताबों में खेतियाँ लहलहाती हैंकिताबों में झरने गुनगुनाते हैंपरियों के किस्से सुनाते हैं किताबों में राकेट का राज़ हैकिताबों में साइंस की आवाज़ हैकिताबों…

कथेतर

सम्पूर्णानन्द जुयाल

वंचित वर्गों के लिए अपना जीवन समर्पित करता एक अध्यापक गत अंक से आगे .... भाग –दो ‘गैर-जिम्मेदार’ युवक से ज़िम्मेदार अध्यापक बनने की ओर... कवि अज्ञेय लिखते हैं, कि “दुःख सब को माँजता है और – चाहे स्वयं सबको मुक्ति देना वह न जाने, किन्तु- जिनको माँजता है उन्हें यह सीख देता है कि सबको मुक्त रखें |” यह पंक्तियाँ चाहे सभी व्यक्तियों पर लागू हो, अथवा नहीं, लेकिन सम्पूर्णानन्द जुयाल जी पर बहुत…

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