बतकही

बातें कही-अनकही…

कथेतर

सम्पूर्णानन्द जुयाल : वंचित वर्गों के लिए अपना जीवन समर्पित करता एक अध्यापक

भाग-चार : बंजारे बच्चों को उनकी मंजिल की ओर ले जाने की कोशिश कहते हैं कि प्रत्येक बच्चे में कुछ ऐसी विशेषताएँ अवश्य होती हैं, जिनको यदि समय रहते पहचानकर उसका परिष्कार किया जाए, तो उन विशेषताओं से संपन्न होकर वह बच्चा अपने आप में एक विशिष्ट व्यक्ति या नागरिक बनता है, उसका लाभ समाज और देश को मिलता है | लेकिन यदि उसकी ख़ूबियों को जानते हुए भी उसको अवसर न दिया जाए, तो…

कथेतर

माधवी ध्यानी : अंग्रेजी भाषा से बच्चों की दोस्ती कराती अध्यापिका

भाग—एक : हर नई भाषा एक नई खिड़की खोलती है ! हम हिंदी पट्टी के लोगों की अपने बचपन और कैशोर्य अवस्था में अंग्रेजी भाषा को लेकर कैसी मनःस्थिति हुआ करती थी, ख़ासकर हिंदी माध्यम से पढ़ने वाले विद्यार्थियों की, यह तो हम सभी जानते हैं | इस भाषा को किस अचम्भे और लालसा से हम हिंदी पट्टी के विद्यार्थी अपने किशोरावस्था में प्रायः ही देखा करते थे और यह सोचते थे कि काश, हमको…

कथेतर

संदीप रावत

भाषा के माध्यम से शिक्षा की उपासना में संलग्न एक अध्यापक भाग-एक:- भाषा से शिक्षा की जुगलबंदी एवं शिक्षा के उद्देश्य लगभग डेढ़ सदी पहले ‘आधुनिक हिन्दी साहित्य’ के प्रणेता भारतेंदु हरिश्चन्द्र ने लिखा था—— निज-भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल बिनु निज-भाषा ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल | अंग्रेजी पढ़ि के जदपि, सब गुन होत प्रवीन पै निज-भाषा ज्ञान बिन, रहत हीन के हीन ||       (भारतेंदु हरिश्चंद्र) ...तो कुछ इसी सिद्धांत…

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