बतकही

बातें कही-अनकही…

कविता

सुनो शम्बूक …!

सुनो शम्बूक...! क्या हुआ, कि तुम मारे गए राम के हाथों वेदों के मन्त्रों का उच्चारण करने के अपराध में ....??? क्या हुआ, यदि नहीं स्वीकार था राजा राम को, वशिष्ठों और विश्वामित्रों को राजाओं, सामन्तों और श्रेष्ठियों को, शक्तिशाली समाज को, तुम्हारा वेदों का अध्ययन करना .....! उसके ‘पवित्र मन्त्रों’ का एक शूद्र द्वारा उच्चारना .....! उनके वेदों के उन रहस्य को समझने में सिर खपाना ......! जिसमें छिपे थे वे तमाम रहस्य कि…

कथा

मेरी स्वानुभूति तेरी स्वानुभूति

-- “आप हमारे साथ खाना नहीं खा सकते, मुखिया जी” अध्यापक ने कहा -- “क्यों .......???” मुखिया जी ने हैरानी से पूछा   -- “यदि आप हमारे साथ खाएँगे, तो हम खाना नहीं खाएँगे, क्योंकि यह हमारा अपमान होगा | आप हमारे साथ नहीं खा सकते ......!” अध्यापक ने दृढ़ता से कहा   -- “..................” मुखिया जी का चेहरा फ़क्क पड़ गया | उनसे कोई उत्तर देते नहीं बन रहा था | अपमान और तिरस्कार…

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