बतकही

बातें कही-अनकही…

कथा

कटोरे की दुनिया से अक्षरों की दुनिया की ओर…

“साहेब, साहेब, कुछ खाने को दे दो, बहुत भूख लगी है ...मेरी बहन बहुत भूखी है ...|” एक बेचारे-से दिखने वाले लगभग 7-8 वर्षीय बच्चे ने, सड़क किनारे खड़े ठेले पर छोले-भटूरे का आनंद लेते दंपत्ति की ओर देखकर दयनीय-याचक स्वर में कहा |“भागो यहाँ से... इन भिखारियों ने तो जीना हराम कर रखा है, इनके मारे तो कोई सड़क पर कुछ खा भी नहीं सकता ...जाओ यहाँ से, वर्ना खींच कर दो कान के…

कविता

सुनो शम्बूक …!

सुनो शम्बूक...! क्या हुआ, कि तुम मारे गए राम के हाथों वेदों के मन्त्रों का उच्चारण करने के अपराध में ....??? क्या हुआ, यदि नहीं स्वीकार था राजा राम को, वशिष्ठों और विश्वामित्रों को राजाओं, सामन्तों और श्रेष्ठियों को, शक्तिशाली समाज को, तुम्हारा वेदों का अध्ययन करना .....! उसके ‘पवित्र मन्त्रों’ का एक शूद्र द्वारा उच्चारना .....! उनके वेदों के उन रहस्य को समझने में सिर खपाना ......! जिसमें छिपे थे वे तमाम रहस्य कि…

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