बतकही

बातें कही-अनकही…

कथा

‘संतान’ से ‘संतान’ तक

आज पायल आई थी, अचानक बड़े दिनों बाद, मुझसे मिलने... लेकिन वह बहुत हैरान-परेशान और दुःखी थी | कारण था, अख़बार में छपी एक ख़बर, जिसमें यह सूचना थी, कि सऊदी अरब में एक बहुत धनी व्यक्ति ने अपनी सगी बहन को उससे विवाह करने के लिए बाध्य किया था | लेकिन उसकी बहन उसका यह कहकर विरोध कर रही थी, कि वह उस आदमी की सगी बहन है, इसलिए वह उससे विवाह नहीं कर…

कथा

जूते-जूतियों की संतानें

- “वो औरत ही अच्छी होती है, आंटी, जो मर्द के पैरों की जूती बनकर रहे |” रामलाल गुप्ता ने तो यह बात अपनी मकान-मालकिन से कही, लेकिन उसका लक्ष्य वहीँ बैठी किरण थी, जो उसी मकान में दूसरी मंज़िल पर बतौर किरायेदार रहती थी | - “.............” मकान मालकिन ने कुछ नहीं कहा, किरण ने भी जानबूझकर नज़रअंदाज़ किया, कौन इस मूर्ख-अहंकारी के मुँह लगे - “अरे आंटी, तू सुन रही है ना !…

कविता

जनक की याचना …

मैं मानता हूँ, राम कि तुम मर्यादा पुरुषोत्तम हो...! कई अविस्मरणीय मर्यादाएँ स्थापित की हैं तुमने, और अमर हो गए अपनी उन मर्यादायों के लिए .....| समाज और धर्म ऋणी है तुम्हारे, उन मर्यादाओं के लिए...! मुझे कुछ नहीं कहना, उनके बारे में मैं नहीं उलझना चाहता तुम्हारी मर्यादाओं से | लेकिन अपनी मर्यादाओं के फेर में तुमने एक ऐसी मर्यादा स्थापित कर दी, जिसने छलनी कर दिया पिताओं का ह्रदय मेरी पुत्री को अवश…

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