बतकही

बातें कही-अनकही…

कविता

बेटी की पुकार

लेखिका— अंजलि डुडेजा ‘अभिनव’ मां, मैं तो बेटी हूं तेरी, मुझे बचा ले। कोई गलती नहीं मेरी, मुझे बचा ले। मां का नाम है ममता, फिर क्यों है ये विषमता? बेटा तेरे कलेजे का टुकड़ा, मेरे लिए दिल क्यों न उमड़ा? तू क्यों हुई इतनी बेदर्द, मैं तो बेटी हूं तेरी मुझे बचा ले। मुझसे ये घर महक उठेगा, उपवन सारा चहक उठेगा; तेरा सारा काम करूंगी, तुझको मैं आराम भी दूंगी; घर आंगन में…

कथा

‘संतान’ से ‘संतान’ तक

आज पायल आई थी, अचानक बड़े दिनों बाद, मुझसे मिलने... लेकिन वह बहुत हैरान-परेशान और दुःखी थी | कारण था, अख़बार में छपी एक ख़बर, जिसमें यह सूचना थी, कि सऊदी अरब में एक बहुत धनी व्यक्ति ने अपनी सगी बहन को उससे विवाह करने के लिए बाध्य किया था | लेकिन उसकी बहन उसका यह कहकर विरोध कर रही थी, कि वह उस आदमी की सगी बहन है, इसलिए वह उससे विवाह नहीं कर…

कविता

कैंडल मार्च – 5

बंद करो कैंडल मार्च...! रोज़-रोज़ दुष्कृत्यों की शिकार होती लड़कियों के परिजन हैं ये नवयुवक... इनका प्रथम कर्तव्य है देश और समाज के हित को समझना, अपनी उन स्त्रियों के हित के लिए खड़ा होना | उन्हें भी जुलूस और कैंडल मार्च निकालना चाहिए, जैसे तुम निकालते हो...! करना चाहिए उनको भी धरना और प्रदर्शन, जैसे तुम करते हो...! उठानी चाहिए निश्चित दण्ड की माँग, संसद में, जैसे तुम उठाते हो निश्चित फाँसी की माँग…

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