बतकही

बातें कही-अनकही…

कथेतर

संगीता कोठियाल फ़रासी

भीख माँगते बच्चों को अक्षरों की दुनिया में ले जाती एक शिक्षिका भाग- तीन :- बच्चों में स्वाभिमान की भूख पैदा करने से आत्म-निर्भरता की ओर... एक सच्ची माँ किसे कहा जा सकता है...? जो अपने बच्चों के खाने-पीने, पहनने-ओढ़ने, बीमारियों से सुरक्षित रखने से संबंधित सभी ज़रूरतों का ध्यान रखते हुए उनका ठीक से पालन-पोषण करे...? या जो बच्चों को धार्मिक कहानियाँ सुनाते हुए, पूजा-पाठ या इबादत आदि में शामिल करते हुए उनको ‘संस्कारवान’…

कथेतर

संगीता कोठियाल फरासी

भीख माँगते बच्चों को अक्षरों की दुनिया में ले जाती एक शिक्षिका भाग-2 : भीख के कटोरे से अक्षरों की दुनिया की ओर बढ़ते क़दम ... पौड़ी में मेरे प्रवास के लगभग डेढ़ सालों के दौरान संगीता जी से कई बार मिलने और उनसे बातचीत के अवसर मिले | एक बार जब मैंने उनसे पूछा, कि उन्हें भीख माँगने वाले बच्चों को पढ़ाने का ख्याल कैसे आया, तो उन्होंने बड़ी ही दिलचस्प घटना बताई, जो…

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