बतकही

बातें कही-अनकही…

कथेतर

मध्याह्न भोजन — दो

‘मध्याह्न भोजन’ से जुड़ी यह जीवित घटना एक ऐसे ‘चोर विद्यार्थी’ की ‘जीवित कहानी’ है, जो भूख से बेहाल अपने छोटे भाई-बहन और अपनी लाचार माँ के लिए स्कूल के मध्याह्न भोजन या ‘मिड-डे-मील’ की चोरी करता है...| भूख वह बला है, जो सीधे-सरल व्यक्ति को भी अपराधी बना देती है— चोर, लुटेरा, यहाँ तक कि हत्यारा भी...! वैसे चोरी भी कमाल की कला और बला है ना...! जब साधन-संपन्न व्यक्ति या समुदाय अपनी ताक़त,…

कथा

मेरी स्वानुभूति तेरी स्वानुभूति

-- “आप हमारे साथ खाना नहीं खा सकते, मुखिया जी” अध्यापक ने कहा -- “क्यों .......???” मुखिया जी ने हैरानी से पूछा   -- “यदि आप हमारे साथ खाएँगे, तो हम खाना नहीं खाएँगे, क्योंकि यह हमारा अपमान होगा | आप हमारे साथ नहीं खा सकते ......!” अध्यापक ने दृढ़ता से कहा   -- “..................” मुखिया जी का चेहरा फ़क्क पड़ गया | उनसे कोई उत्तर देते नहीं बन रहा था | अपमान और तिरस्कार…

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