बतकही

बातें कही-अनकही…

आलोचना

शांतनु-सत्यवती प्रेम-कथा : आर्यों का लव-जिहाद

विद्रोही-समाजों को नियंत्रित करने हेतु उनकी स्त्रियाँ भावनात्मक रूप से ‘बंधक’ आक्रमणकारी-आर्य जब मध्य-एशिया से चले और हमलावर बनकर रास्ते में पड़नेवाली सभ्यताओं-संस्कृतियों, उनके शहरों-नगरों-गाँवों को रौंदते हुए भारत में घुसे, तो वे अपने साथ आर्य-स्त्रियाँ लेकर नहीं आए थे; उनके साथ केवल गिनी-चुनी स्त्रियाँ ही आई थीं | इसलिए उन्होंने यहाँ आने के बाद ग़ैर-आर्य समाजों और मूल-निवासी समाजों की स्त्रियों पर अपनी नज़रें टिकाई | वैसे भी उनकी क़बीलाई स्त्रियाँ कबीलाई-किस्म की ही…

आलोचना

पराशर-मत्स्यगंधा कथा : आर्यों का लव-जिहाद

(असहाय-अकेली स्त्री भोग की वस्तु) आर्य जब अपनी तलवारों और तीर-धनुष के बल पर रक्तपात करते हुए भारत में घुसे, तो यहाँ पहले से रह रहे निवासियों द्वारा उनका जबर्दस्त विरोध-प्रतिरोध हुआ | हालाँकि आर्यों के शुरूआती हमले इतने अचानक थे और धोखाधड़ी के साथ भी, कि आरम्भ में यहाँ के निवासी संभलने का मौका नहीं पा सके और बड़ी संख्या में उनका नरसंहार हुआ | लेकिन जब उन पूर्व-निवासियों को आर्यों की नीयत समझ…

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