बतकही

बातें कही-अनकही…

कथेतर

आशीष नेगी

कला के मार्ग से शिक्षा के पथ की ओर भाग-दो   यात्रा : रंगमंच से जन सरोकारों तक  रंगकर्मी और साहित्यकार सफ़दर हाशमी की हत्या उनके नाटक ‘हल्ला बोल’ के मंचन के दौरान क्यों हुई थी ? क्या इसलिए कि वे एक नाटक कर रहे थे ? अथवा इसलिए कि उनके नाटकों में ‘कुछ ऐसा’ था, जिसने हत्या करनेवालों को हत्या करने के लिए ‘बाध्य’ किया ? तब सवाल यह भी उठता है, कि ‘वह…

कथेतर

सम्पूर्णानन्द जुयाल

वंचित वर्गों के लिए अपना जीवन समर्पित करता एक अध्यापक गत अंक से आगे .... भाग –दो ‘गैर-जिम्मेदार’ युवक से ज़िम्मेदार अध्यापक बनने की ओर... कवि अज्ञेय लिखते हैं, कि “दुःख सब को माँजता है और – चाहे स्वयं सबको मुक्ति देना वह न जाने, किन्तु- जिनको माँजता है उन्हें यह सीख देता है कि सबको मुक्त रखें |” यह पंक्तियाँ चाहे सभी व्यक्तियों पर लागू हो, अथवा नहीं, लेकिन सम्पूर्णानन्द जुयाल जी पर बहुत…

कथेतर

सम्पूर्णानन्द जुयाल

वंचित वर्गों के लिए अपना जीवन समर्पित करता एक अध्यापक भाग-एक : यदि कोई मुझसे पूछे, कि संसार का सबसे अधिक दायित्वपूर्ण कार्य कौन-सा है ? तो निःसंकोच मेरा उत्तर होगा —अध्यापक का कार्य | क्योंकि वही समाज का निर्माता है, वही उसका विनाशक भी; वही उसका मार्गदर्शक है, वही उसका पथ-भ्रष्टक भी; वह चाहे तो समाज को नई दिशा मिल जाय और वह यदि निश्चय कर ले तो समाज को दिग्भ्रमित करके पतन की…

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