बतकही

बातें कही-अनकही…

निबंध

भूख और भोजन

‘भूख’ क्या है ? ‘भूख’ तो केवल ‘भूख’ है किसी भी व्यक्ति को, परिवार, समाज, नस्लों, पीढ़ियों को भूखा रखकर करवाया जा सकता है उनसे कोई भी काम असंभव जो नहीं कर सकते, खाए-पिए-अघाए लोग — चोरी झपटमारी हत्या बलात्कार...! क्योंकि भूखा इन्सान ‘इन्सान’ नहीं होता है वह केवल होता है— ‘भूख’ — ‘साक्षात् भूख’ एक धधकती आग जिसमें भस्म हो जाती है नैतिकता ईमानदारी प्रेम इंसानियत समझदारी बुद्धि ह्रदय तन और मन भी... (स्व-रचित…

आलोचना

शिक्षा का अधिकार, वंचित वर्ग और पास-फेल का खेल

ज़रा हम अपने आस-पास नज़र दौड़ाएं... लोगों को बातें करते हुए ज़रा ध्यान से सुनें... उनकी प्रतिक्रियाएँ देखें, ...उनके आग्रह को ज़रा ग़ौर से देखें और समझने की कोशिश करें... क्या उनकी कटूक्तियों में, उनकी घृणा, उनके क्रोध में कुछ विशिष्टता नज़र आती है, ...जब वे समाज के वंचित एवं कमज़ोर वर्गों की शिक्षा के सम्बन्ध में बातें कर रहे होते हैं...? क्या आपने भी ऐसी उक्तियाँ कभी-कभी उनके मुखों से सुनी हैं, जो उनके…

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