बतकही

बातें कही-अनकही…

कथेतर

संदीप रावत

भाषा के माध्यम से शिक्षा की उपासना में संलग्न एक अध्यापक भाग-एक:- भाषा से शिक्षा की जुगलबंदी एवं शिक्षा के उद्देश्य लगभग डेढ़ सदी पहले ‘आधुनिक हिन्दी साहित्य’ के प्रणेता भारतेंदु हरिश्चन्द्र ने लिखा था—— निज-भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल बिनु निज-भाषा ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल | अंग्रेजी पढ़ि के जदपि, सब गुन होत प्रवीन पै निज-भाषा ज्ञान बिन, रहत हीन के हीन ||       (भारतेंदु हरिश्चंद्र) ...तो कुछ इसी सिद्धांत…

कथेतर

आशीष नेगी

कला के मार्ग से शिक्षा के पथ की ओर भाग-तीन :— रंगमंच, बच्चे और सपनों की दुनिया क्या आपने कभी अपने आस-पास एक अध्यापक को अपने कन्धों पर एक भारी थैला लटकाए उत्तराखंड की काँटों एवं कीड़े-मकोड़ों से भरी पथरीली-सर्पीली राहों में पगडंडियों के सहारे पहाड़ों की ऊँचाइयों को नापते या घाटियों की गहराई में उतरते देखा है? आपका कभी ध्यान जाय, तो देखिएगा अवश्य, आपके आसपास ही कहीं एक आशीष नेगी नाम का अध्यापक…

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