बतकही

बातें कही-अनकही…

कथेतर

‘सुबह के अग्रदूत’— दो

भूमिका बडोला ...जब हमारे चारों ओर निराशमय वातावरण हो, नकारात्मक शक्तियाँ अपने चरम पर हों, राजनीतिक-परिदृश्य निराशा उत्पन्न कर रहा हो, सामाजिक-सांस्कृतिक हालात बद से बदतर होते जा रहे हों, लोगों के विचारों एवं बौद्धिक-चिंतन में लगातार कलुषता भरती चली जा रही हो और एक-दूसरे के प्रति वैमनस्यता तेज़ी से अपने पाँव पसार रही हो... तब ऐसे में जब युवा हो रही पीढ़ी के बीच से कुछ ऐसे लोग निकलकर सामने आने लगें, जो अंगद…

कथेतर

‘सुबह के अग्रदूत’— एक

पल्लवी रावत हम सबने कभी न कभी अल-सुबह या ब्रह्म-मुहूर्त में सूरज के निकलने की दिशा में उसके ठीक आगे-आगे आते हुए उस चमकते तारे को अवश्य देखा होगा, जो सूरज के आसमान में उदीयमान होने के ठीक पहले उसी स्थान से ऊपर उठता है, जहाँ से सूरज को आना है | वह लोगों को सूरज के आने और सुबह होने की सूचना देता है | ...जब घड़ियाँ नहीं होती थीं, तब लोग उसे ही…

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