बतकही

बातें कही-अनकही…

आलोचना

जी हाँ, वंचित-महिलाएँ अब जाग रही हैं

“जिन सवर्ण-महिलाओं के लिए वंचित-समाज की हमारी माता सावित्रीबाई फुले ने सबसे पहले स्कूल शुरू किया, वह भी हमारे लिए स्कूल शुरू करने से पहले; वे ही सवर्ण औरतें आज कैसे उनको नकार सकती हैं? उनको कैसे समझ में नहीं आता कि उनको उनके ही समाज के पुरुष भरमा रहे हैं?...” “केवल हमारे वंचित-समाज की माँ, बहनें, बेटियाँ ही माता सावित्रीबाई की ऋणी नहीं हैं, बल्कि ब्राह्मण औरतों सहित सभी सवर्ण औरतें भी माता सावित्रीबाई…

कविता

अम्बेडकर ने कब कहा था…

मैंने तो कहा था— शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो ! ये तीन मंत्र निचोड़ थे, मेरे जीवन भर के परिश्रम और संघर्षों के जिन्हें मैंने तुमको दिया था अनमोल धरोहर के रूप में ! ताकि तुम भी अधिकार पा सको — अपने मानव होने के | सम्मान और पहचान मिल सकें — तुम्हारी संस्कृति एवं सभ्यता को भी | और तुम भी जी पाओ — एक सम्मानजनक मानव-जीवन...! मैंने कहा था— ‘शिक्षित बनो’... तो…

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