बतकही

बातें कही-अनकही…

निबंध

हमें फ़टी जींस नहीं तन ढँकने का अधिकार चाहिए

घटना 19 सदी के त्रावणकोर (केरल) के हिन्दू रियासत की है | वहाँ की रानी अत्तिंगल की एक दासी एक दिन अपने शरीर के ऊपरी भाग, यानी स्तनों को ढँककर महल में अपना काम करने गई | रानी ने जब देखा कि उसकी अदना-सी दासी ने उच्च-वर्णीय समाज के बनाए नियमों का उल्लंघन करते हुए अपने स्तनों को ढँककर रखा है तो रानी अत्तिंगल के क्रोध की सीमा न रही और उसने राजकर्मचारियों को उस…

निबंध

फ़टी जींस, लड़कियाँ और संकट में संस्कृति

‘जींस’ को लेकर चंद महीनों पहले ही उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री का वह सार्वजनिक बयान तो सबको याद ही होगा, जिसमें वे किसी महिला द्वारा फ़टी हुई जींस पहने जाने को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज़ कर रहे थे और जिसपर विवाद खड़ा हो गया था ! यहाँ बात उसी ‘जींस’ की हो रही है | ‘जींस’ वह वस्त्र है, जो यूरोप में पैदा हुई | दरअसल यूरोप में आए ‘नवजागरण’ और उसके परिणामस्वरूप विकसित हुए…

कविता

अम्बेडकर ने कब कहा था…

मैंने तो कहा था— शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो ! ये तीन मंत्र निचोड़ थे, मेरे जीवन भर के परिश्रम और संघर्षों के जिन्हें मैंने तुमको दिया था अनमोल धरोहर के रूप में ! ताकि तुम भी अधिकार पा सको — अपने मानव होने के | सम्मान और पहचान मिल सकें — तुम्हारी संस्कृति एवं सभ्यता को भी | और तुम भी जी पाओ — एक सम्मानजनक मानव-जीवन...! मैंने कहा था— ‘शिक्षित बनो’... तो…

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