बतकही

बातें कही-अनकही…

कथेतर

महेशानंद : सम्पूर्ण समाज का ‘शिक्षक’

भाग-एक : बहुमुखी प्रतिभा का धनी अध्यापक एक अनुकरणीय अध्यापक वह होता है, जो न केवल अपने विद्यार्थियों को ‘पढ़ाने’ का काम सफ़लतापूर्वक कर रहा हो, बल्कि इसके समानान्तर उसके द्वारा समाज को भी ‘पढ़ाने’ और जगाने का काम निरंतर किया जा रहा हो | एक शिक्षक केवल अपने विद्यार्थियों-मात्र का ही शिक्षक नहीं होता है, बल्कि वह कम-से-कम उस पूरे समाज का शिक्षक होता है, जहाँ वह रह रहा है, जहाँ वह कार्य कर…

कथेतर

‘सुबह के अग्रदूत’— दो

भूमिका बडोला ...जब हमारे चारों ओर निराशमय वातावरण हो, नकारात्मक शक्तियाँ अपने चरम पर हों, राजनीतिक-परिदृश्य निराशा उत्पन्न कर रहा हो, सामाजिक-सांस्कृतिक हालात बद से बदतर होते जा रहे हों, लोगों के विचारों एवं बौद्धिक-चिंतन में लगातार कलुषता भरती चली जा रही हो और एक-दूसरे के प्रति वैमनस्यता तेज़ी से अपने पाँव पसार रही हो... तब ऐसे में जब युवा हो रही पीढ़ी के बीच से कुछ ऐसे लोग निकलकर सामने आने लगें, जो अंगद…

कथेतर

मनोहर चमोली ‘मनु’

‘बाल-साहित्य’ के माध्यम से समाज की ओर यात्रा... भाग दो :- ‘मनोहर चमोली’ से ‘मनोहर चमोली’ तक   मनोहर चमोली ‘मनु’...! एक बाल-साहित्यकार...! उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल में पौड़ी जिले के अंतर्गत स्थित राजकीय उच्च विद्यालय, केवर्स के एक समर्पित अध्यापक | कई लोगों, या यूँ कहा जाय, कि अपने विरोधियों एवं इस साहित्यकार-अध्यापक को नापसंद करनेवालों की दृष्टि में एक बहिर्मुखी-व्यक्तित्व, एक अहंकारी, मुँहफट, ज़िद्दी, आत्म-मुग्ध, आत्म-प्रवंचना के शिकार, अपने विचारों के प्रति अति-आग्रही...…

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