बतकही

बातें कही-अनकही…

निबंध

भूख और भोजन

‘भूख’ क्या है ? ‘भूख’ तो केवल ‘भूख’ है किसी भी व्यक्ति को, परिवार, समाज, नस्लों, पीढ़ियों को भूखा रखकर करवाया जा सकता है उनसे कोई भी काम असंभव जो नहीं कर सकते, खाए-पिए-अघाए लोग — चोरी झपटमारी हत्या बलात्कार...! क्योंकि भूखा इन्सान ‘इन्सान’ नहीं होता है वह केवल होता है— ‘भूख’ — ‘साक्षात् भूख’ एक धधकती आग जिसमें भस्म हो जाती है नैतिकता ईमानदारी प्रेम इंसानियत समझदारी बुद्धि ह्रदय तन और मन भी... (स्व-रचित…

कथेतर

सरिता मेहरा नेगी : ‘एक विद्यालय’ बनाने की कोशिश में ‘पहली अध्यापिका’

भाग-दो : ‘पहली अध्यापिका’ का अनोखा विद्यालय पिछले लेख ‘सरिता मेहरा नेगी : ‘एक विद्यालय’ बनाने की कोशिश में ‘पहली अध्यापिका, भाग-एक’ में यह बात देखी जा चुकी है कि विद्यालय-दर-विद्यालय होते हुए सरिता मेहरा नेगी मई 2014 में स्थानांतरित होकर कोटद्वार स्थित जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के दायरे में मौजूद उस विद्यालय में आईं, जो अभी तक ‘अदृश्य’ रूप में था, जिसके ‘होने’ की सूचना वहाँ लगे सूचनापट्ट से ही मिलती थी | अब…

निबंध

व्यवसाय, धर्म और पितृसत्ता के बरक्स खड़ी फ़टी जींस

‘जींस’ या ‘फ़टी जींस’ से ‘पितृसत्ता’ का क्या संबंध है, इसके एक पक्ष को तो पिछले दो लेखों फ़टी जींस, लड़कियाँ और संकट में संस्कृति और ‘जींस पहनती बेटियाँ माता-पिता को अच्छी नहीं लगतीं’में देख लिया गया, लेकिन साथ में यह भी समझना ज़रूरी है कि क्या ‘पितृसत्ता’ सदैव ही फ़टी हुई जींस या ऐसे ही दूसरे ‘संस्कृति-विरोधी’ तत्वों का विरोध करती है? अथवा उसके सामने कुछ ‘परिस्थितियाँ’ ऐसी भी आती हैं जब वह प्रत्यक्ष…

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